: उत्तर प्रदेश की सेहत सुधारने के लिए सरकार पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी में
Thu, Dec 1, 2022
अभी
बात ज्यादा पुरानी नहीं है उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा सरकार ने ठीक चुनाव से पहले 24 करोड़ की आबादी वाली राज्य में घोषणा की थी कि हर जनपद में मेडिकल कॉलेज बनाया जाएग और इस पर पिछली योगी सरकार ने कार्य भी शुरू कर दिया था पहले चरण में 39 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई फिर बाद में यह आंकड़ा 58 हो गया हालांकि ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों के निर्माणाधीन रहते वही चुनावी कवरेज लेने के लिए पिछली सरकार ने मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन तक कर डाला जिसको की विपक्षी पार्टियों ने जमकर मुद्दा बनाया लेकिन सरकार चुनाव से पहले किए गए अपने वादे को भूल ही नहीं है जल्दी 6 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निजी संस्थाओं के टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे सार्वजनिक निजी सहभागिता मॉडल पर यह मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे जिसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बीते सितंबर माह में 1012 करोड़ की आर्थिक मदद करने की मंजूरी दे दी है इस पर 1525 करोड रुपए खर्च होनी है बाकी रकम निजी संस्थाएं खर्च करेगी जिन्हें 33 साल के लिए जिला अस्पताल में उसकी जमीन लीज पर दी जाएगी
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने बताया कि मैनपुरी महोबा बागपत हमीरपुर हाथरस और कासगंज उत्तर प्रदेश के इन 6 जनपदों में पीपीपी मॉडल पर आधारित नए मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारियां तेजी पर की जा रही है जल्द ही निजी संस्थाओं को इसके लिए आमंत्रित किया जाएगा कैबिनेट की मंजूरी के बाद विभाग ने कार्यवाही तेज कर दी है
आपको बताते चलें कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन वाली योगी सरकार ने देश की जीडीपी बढ़ाने के लिए भले ही बड़ा योगदान दिया हो लेकिन स्वास्थ्य के मामले में प्रदेश की हालत खराब है वह निचले पायदान पर खिसक चुका है इसका कारण है प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर कम खर्च और डॉक्टरों की कमी तथा अनट्रेंड नर्सिंग स्टॉप प्रदेश की खराब स्वास्थ्य के प्रमुख कारण है अभी हाल ही में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में स्वास्थ्य के मामले में उत्तरप्रदेश सबसे निचले पायदान पर है जबकि केरल इस मामले में सबसे ऊपर है प्रदेश की यूपी सरकार का कहना है कि आजादी के बाद से 2016 तक प्रदेश में केवल 12 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे 32 मेडिकल कॉलेजों को 2016 के बाद बनाया गया 59 राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रदेश सरकार ने द्वारा सत्ता संभालने से पूर्व ही तैयार करवा लिए थे और अभी चेन्नई पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज को बनाने की मंजूरी कैबिनेट ने दे दी है इस प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 75 जनपदों में मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जाएगा
मेडिकल प्रवेश परीक्षा neet-ug क अनुसार देश में कुल 91927 डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस में दाखिला लेते हैं इसमें सरकारी व निजी दोनों संस्थानों की सीटें शामिल है जिसमें उत्तर प्रदेश की बात करें तो 4303 सरकारी मेडिकल कॉलेजेस की सीट और 4750 निजी संस्थानों के मेडिकल कॉलेज की सीट है कुल मिलाकर प्रदेश में डॉक्टर बनने वालों का आंकड़ा प्रतिवर्ष 10000 के नीचे ही रहता है जबकि जरूरत कहीं ज्यादा होती है विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो करीब 1000 मरीजों पर एक डॉक्टर की आवश्यकता होती है इस लिहाज से 24 करोड़ की आबादी वाले राज्य में प्रतिवर्ष पास करने वाले डॉक्टरों की संख्या का काफी कम है डेंगू मलेरिया वायरल चिकनगुनिया मस्तिष्क ज्वर सहित प्रदेश में हर वर्ष तमाम बीमारियों का संक्रमण तेजी से होता है इतनी बड़ी आबादी को इन संक्रमण बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध संसाधन स्टाफ डॉक्टर पर्याप्त नहीं कहीं जा सकते हैं लिहाजा इस दिशा में प्रदेश सरकार को तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है
: स्मार्ट सिटी लखनऊ में 25 फीट नीचे धसी सड़क
Tue, Nov 29, 2022
स्मार्ट सिटी लखनऊ में स्मार्ट इंजीनियरिंग की सोमवार को एक तस्वीर और नजर आई जिसमें की लखनऊ के विकास नगर इलाके में सड़क के बीचो बीच अचानक 25 फुट गहरा गड्ढा हो गया हालांकि इस दौरान कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ लेकिन आपको बताते चलें स्मार्ट सिटी लखनऊ में इस टाइप के स्मार्ट निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं यह पहला मौका नहीं है इससे पहले भी निशातगंज वाले इलाके में 4 दिन पहले ही स्मार्ट सिटी के स्मार्ट इंजीनियरिंग कि गलत इंजीनियरिंग ने बनाई गई ब्रेकर से कार चालक सवार युवक की मौत हो गई
मीडिया विद यू की पड़ताल से पता चला विकासनगर की सड़क पर हुए अचानक इस गड्ढे ने सरकारी विभागों की पोल खोल दी प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सड़क के पास में ही सीवर और नगर निगम की लाइन से जल रिसाव हो रहा था जिसका की तमाम शिकायतों के बाद भी विभाग ने कोई भी कोई ध्यान नहीं दिया गया जिसकी वजह से पानी और कीचड़ जमा होता रहा और परिणाम सबके सामने अच्छा रहा हादसे के वक्त सड़क पर कम यातायात था अन्यथा बड़ी दुर्घटना भी घट सकती थी आजकल लखनऊ में स्मार्ट सिटी के नाम पर जो गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य चल रहा है उसकी लगातार विभाग द्वारा अनदेखी की जा रही है नगर निगम के चुनाव पास आते ही इस प्रकार के गुणवत्ता विहीन घटिया निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी के नाम पर करवाने के पीछे विभाग की मंशा आखिर क्या है
कहीं इसके पीछे पनपता हुआ भ्रष्टाचार तो नहीं मीडिया संस्थानों द्वारा अति व्यस्ततम इलाकों में शुमार सड़कों पर हो रहे गुणवत्ता विहीन व कछुआ गति से कार्यों पर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं फिर भी विभाग की नींद खुली जिसकी वजह से यातायात बाधित होता है और रोजाना वाले यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है अभी हाल ही में हुई निशातगंज लखनऊ की घटना इस कार्य की बानगी भर है जिसमें गलत तरीके से बनाई गई ब्रेकर के कारण एक युवक की कार पलट गई और उसकी मौत हो गई स्मार्ट सिटी लखनऊ में नगर निगम की कारगुजारी से नलों में गंदा पानी कीचड़ आना एवं चौतरफा मच्छरों का पनपना एक आम बात है राजधानी होने के बावजूद भी आवारा पशु एवं कूड़े के ढेरों से नागरिकों को रोजाना दो-चार होना पड़ता है नगर निगम एवं संबंधित विभागों द्वारा डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों में किए जाने बाली उपाय नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की भी हाथ पैर फूल चुके हैं
अभी हाल ही में यातायात जाम संबंधी समस्या को लेकर संबंधित विभागों के साथ हमारे राज्य सरकार के बड़े-बड़े मंत्रियों ने भी मीटिंग कर व्यवस्था बनाने का अश्वासन दिया था लेकिन वही रवैया जो हमेशा से होता आया है ढाक के तीन पात चौतरफा जाम खासकर की स्कूलों की छुट्टी और दफ्तर जाने की समय जाम रहना और उसको सामना करना लखनऊ के नागरिकों के लिए आदत सी हो गई है
: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का एतराज
Fri, Nov 25, 2022
एक
याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति में जल्दबाजी और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए
हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल एजी से पूछा कि नियुक्ति 1 दिन में की गई है यह जल्दबाजी दर्शाती है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में इतनी तत्परता क्यों हम जानना चाहते हैं नियुक्ति की प्रक्रिया और आधार क्या थी कानून मंत्री ने चार नामों को किस आधार पर तय किया हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है मैं केवल प्रक्रिया जानना चाहता हूं सरकार इसे प्रतिकूल मुकदमेंे बाजी की तरह से ना ले
सरकार की तरफ से पेश होते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने नियुक्ति को सही बताते हुए अनुरोध किया है कि कोर्ट नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को देखने से पहले टीका टिप्पणी ना करें उन्हों7ने कहा है कि सभी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति त्वरित प्रक्रिया से ही की जाती है आमतौर पर प्रक्रिया 3 दिन से अधिक नहीं चलती मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया है मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्त की प्रक्रिया से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच सदस्यों की संवैधानिक पीठ मैं जस्टिस केएम जोसेफ जस्टिस ऋषिकेश अनिरुद्ध बोस जस्टिस अजय रस्तोगी सहित जस्टिस सिटी रवि कुमार शामिल थ
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित फाइल को कोर्ट में पेश करने को कहा है जिस पर अटॉर्नी जनरलने गुरुवार को कोर्ट में फाइल पेश करते हुए कहा है कि कई नियुक्तियां 24 घंटे या 12 घंटे के भीतर हुई है कोई ट्रिगर बिंदु नहीं है एक प्रक्रिया है जिसे अपनाया गया है उनकी नियुक्ति से संबंधित पूरे मामले को समग्रता से देखने की जरूरत है चयन प्रक्रिया में व्यक्त की सेवा में अनुभव उसके पास कार्यकाल के लिए बचे समय आज सभी चीजों को संपूर्णता में देखते हुए किया जाता है एवं बैच की वरिष्ठता एवं क्रम के अनुसार प्रक्रिया होती है
याचिका में कहा गया था की मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए जो कॉलेजियम बने उसमें भारत के प्रधानमंत्री लोकसभा में नेता विपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शामिल हो जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा है कि 15 मई को चुनाव आयुक्त का पद रिक्त हुआ था और 18 नवंबर को नियुक्त की गई आप बताइए कि 15 मई से 18 नवंबर के बीच नियुक्त के लिए क्या प्रक्रिया की गई संवैधानिक पीठ ने सीईसी और इसी के 6 साल के कार्यकाल के पूर्णा ना होने को भी लेकर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा सी सी आई सी दोनों का कार्यकाल 6 वर्ष का होगा यह नियम है और इसका पालन किया जाना चाहिए जबकि उनके 6 साल के कार्यकाल से पहले नियुक्त किया जाना नियम और कानून का उल्लंघन है उन्होंने आगे कहा है कि कई बार नियुक्ति को लेकर जल्दी होती है लेकिन जब मामला यहां लंबित है तब भी यह नियुक्ति की गई है चयनित अरुण गोयल गणित में गोल्ड मेडलिस्ट है और उनका एकेडमिक रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा है लेकिन क्या यह चैन का आधार हो सकता है