यूपी के युवाओं के लिए नई दिशा: रोजगार से AI तक : अब बनेगी नई युवा नीति, मुख्यमंत्री योगी की घोषणा
Mon, Aug 17, 2026
यूपी के युवाओं के लिए नई दिशा: रोजगार से AI तक, अब बनेगी नई युवा नीति
MediaWithYou | उत्तर प्रदेश
15 अगस्त के मंच से बड़ा संकेत, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार, AI और उद्यमिता पर होगा फोकस
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में युवाओं को लेकर सरकार की रणनीति अब रोजगार और पारंपरिक कौशल तक सीमित नहीं रहने वाली है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लिए नई
युवा नीति
लाने की घोषणा की है। प्रस्तावित नीति में कौशल विकास, रोजगार सृजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्यमिता जैसे भविष्य के क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने का संकेत मिला है।
इस घोषणा को उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की कोशिश यह है कि प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि
कौशलयुक्त कर्मचारी, उद्यमी और रोजगार पैदा करने वाला युवा
बनाया जाए।
रोजगार की चुनौती से अवसर की ओर
उत्तर प्रदेश में रोजगार और कौशल विकास पहले से ही सरकार के प्रमुख एजेंडे में रहे हैं। श्रम एवं सेवायोजन विभाग की समीक्षा में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के माध्यम से युवाओं को देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन किए जाने की जानकारी भी दी गई थी, जिसमें 2,300 युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार के लिए हुआ।
यानी नई युवा नीति को केवल एक नई घोषणा के तौर पर नहीं, बल्कि पहले से चल रहे रोजगार और कौशल कार्यक्रमों को एक व्यापक नीति के तहत जोड़ने की दिशा में देखा जा सकता है।
AI और नई टेक्नोलॉजी बनेगी युवाओं की ताकत?
आज रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवाएं, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार भी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र को विकास के प्रमुख क्षेत्रों में रख रही है। ऐसे में प्रस्तावित युवा नीति में AI और डिजिटल स्किल को स्थान मिलना प्रदेश के युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
नौकरी के साथ उद्यमिता पर भी जोर
नई नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू
Entrepreneurship यानी उद्यमिता
है। इसका अर्थ है कि युवा केवल सरकारी या निजी नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपना कारोबार और स्टार्टअप शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ें।
उत्तर प्रदेश में पहले से ही मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी योजनाएं संचालित हैं। सरकारी पोर्टल के अनुसार इस योजना के अंतर्गत युवाओं को उद्यम स्थापित करने और रोजगार सृजन के लिए
ब्याज-मुक्त ऋण सहायता
उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
ऐसे में नई युवा नीति यदि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार, मेंटरशिप और तकनीकी सहायता को एक साथ जोड़ती है, तो इसका असर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक भी पहुंच सकता है।
कक्षा से करियर तक बदलने की तैयारी
युवाओं की तैयारी केवल कॉलेज या रोजगार कार्यालय से शुरू नहीं होगी। प्रदेश सरकार माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी शिक्षा को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दे रही है।
इसका मतलब साफ है—भविष्य की तैयारी स्कूल से ही शुरू करने की दिशा में नीति का विस्तार किया जा सकता है।
असली चुनौती अब क्रियान्वयन की
नई युवा नीति की घोषणा निश्चित रूप से बड़ी खबर है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नीति जमीन पर किस तरह लागू होती है।
क्या गांव के युवा तक आधुनिक ट्रेनिंग पहुंचेगी?
क्या छोटे शहरों के युवाओं को AI और डिजिटल कौशल की ट्रेनिंग मिलेगी?
क्या ट्रेनिंग के बाद वास्तविक रोजगार या बाजार से कनेक्शन होगा?
क्या युवा उद्यमियों को केवल ऋण मिलेगा या कारोबार शुरू करने के बाद भी मार्गदर्शन मिलेगा?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या नीति का लाभ प्रदेश के पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक समान रूप से पहुंच पाएगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में इस नई नीति की वास्तविक सफलता तय करेंगे।
MediaWithYou का निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश के लिए युवा केवल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा नहीं, बल्कि प्रदेश की अगली आर्थिक छलांग का सबसे बड़ा आधार हैं।
स्किल + रोजगार + AI + उद्यमिता
को एक साथ जोड़ने की कोशिश सफल होती है तो इसका असर केवल नौकरी के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में नए कारोबार और नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
15 अगस्त की घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में युवाओं की नीति अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी का संकेत दे रही है।
MediaWithYou की नजर अब इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित युवा नीति का अंतिम स्वरूप क्या होगा और युवाओं के लिए इसमें कौन-कौन से ठोस अवसर शामिल किए जाएंगे।
: आर्ट जैम 2025 : बच्चों ने रचा खुशियों का रंगीन संसार
Sun, Sep 7, 2025
लखनऊ 6 सितम्बर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में स्थित मॉडर्न स्कूल के सारनाथ हॉल में उत्साह और उमंग से भरा माहौल था, जब शहरभर से आए लगभग 200 बच्चों ने एक विशाल खाली दीवार को खुशियों से भरे भव्य भित्ति-चित्र (म्यूरल) में बदल दिया।
इस कार्यक्रम आर्ट जैम 2025 में 4 से 15 वर्ष तक के बच्चों ने भाग लिया। इसमें सी.एम.एस., ला मार्टिनियर और सेठ एम.आर. जयपुरिया जैसे अनेक विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए।मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल मैडम मीना काने ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों को यह स्वतंत्रता दी गई थी कि वे अपनी कला के माध्यम से यह व्यक्त करें कि उन्हें खुशी कहाँ से मिलती है – चाहे घर में, स्कूल में या फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में। इस साझा चित्रकला में इंद्रधनुष, परिवार, पालतू जानवर, हँसी और सपनों जैसी अनेक झलकियाँ दिखाई दीं।
यह विविध रंगों का संगम इस बात का प्रतीक था कि एक बच्चे के जीवन में भावनात्मक सुख-समृद्धि कितनी महत्वपूर्ण है। एवं उसके समग्र विकास के लिए जरूरी भी हैकोऑर्डिनेटर मैडम मनीषा राठौड़ ने कहा है कि अनेक प्रतिभागियों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहा। उन्हें गर्व था कि उनकी चित्रकला सैकड़ों अन्य कलाकृतियों के साथ सजी और वे किसी बड़े प्रयास का हिस्सा बने। प्रत्येक बच्चे को एक "जॉय किट" भेंट की गई, जिसमें भावनात्मक सुख-समृद्धि को बढ़ावा देने वाले तत्व शामिल थे।स्पोर्ट फैकल्टी से रजनीश त्रिवेदी ने बताया है कि भावनात्मक सुरक्षा हर बच्चे का अधिकार है। रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भावनात्मक सुख-समृद्धि को प्रोत्साहित कर आर्ट जैम ने बच्चों की आवाज़, उनकी खुशी और उनके अपनत्व का उत्सव मनाया—और सबके लिए एक उज्जवल दुनिया को रंगों में सजाया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतियोगी बच्चों को स्कूल की तरफ से जॉय किट" एवं सर्टिफिकेट प्रदान किए गए
: नवरात्रि का छठा दिन, माता का छठा स्वरूप: माता कात्यायनी"
Sun, Apr 14, 2024
नई दिल्ली 14 अप्रैल मां कात्यायनी देवी माता के नौ रूपों में से छठे स्वरूप को कहते हैं शास्त्रों के अनुसार देवआदि देव महादेव के साथ विराजने वाली मां पार्वती का ही दूसरा नाम कात्यानी देवी है , संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हैमावती, इस्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है, स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थी, जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है, जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतांजलि के महाभाष्य में किया गया है, जिसे दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में लिखी गयी थी। उनका वर्णन देवी-भागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है जिसे ४०० से ५०० ईसा में लिपिबद्ध किया गया था। बौद्ध और जैन ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों, विशेष रूप से कालिका-पुराण (१०वीं शताब्दी) में उनका उल्लेख है, जिसमें उद्यान या उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है।
परंपरागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के षष्ठी में उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा' चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माँ कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।
कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।
ऐसी भी कथा मिलती है कि ये महर्षि कात्यायन के वहाँ पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्त सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन इन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था।
माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भास्वर है। इनकी चार भुजाएँ हैं। माताजी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।
माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।
नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए।'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥अर्थ : हे माँ ! सर्वत्र विराजमान और शक्ति -रूपिणी प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।
इसके अतिरिक्त जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हें इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है। विवाह के लिये कात्यायनी मन्त्र-ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि !
नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:।माँ को जो सच्चे मन से याद करता है उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं। जन्म-जन्मांतर के पापों को विनष्ट करने के लिए माँ की शरणागत होकर उनकी पूजा-उपासना के लिए तत्पर होना चाहिए।"जय माता दी"