: 24 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेई का जन्म उत्सव की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन
Mon, Dec 19, 2022
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए, आंधियों में जलाएं है बुझते दिए
अटल बिहारी वाजपेयी की जयन्ती की पूर्व संध्या पर 24 को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का होगा आयोजनराजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी रहेंगे मौजूद, कुमार विश्वास बिखेरेंगे वाजपेयी की सांस्कृतिक विरासत के रंगलखनऊ। 19 दिसंबर
'हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए, आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए'। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यह मर्मस्पर्शी पंक्तियां शनिवार को लखनऊ की फिजाओं में गूंजेंगी। उनकी जयन्ती की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित तमाम गणमान्यजन मौजूद रहेंगे। कवि डॉ. कुमार विश्वास भी समारोह में शिरकत करेंगे। यह जानकारी सोमवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दी।
उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी की जयन्ती की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन 24 दिसंबर को किया जा रहा है। शनिवार को शाम पांच बजे से अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर (केजीएमयू) पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आहूत बैठक में फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सुझाव साझा किए। बैठक में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी मौजूद रहे।
डिप्टी सीएम ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के संस्मरणों को संकलित कर एक पुस्तक का रूप दिया जाएगा। पुस्तक प्रकाशन के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी समाजसेवी सुभाष पांडेय को सौंपी गई है। अटल बिहारी वाजपेयी डिग्री कॉलेज के प्रचार व प्रसार का कार्य भी कमेटी के पदाधिकारी करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रहेंगे। भाजपा महानगर अध्यक्ष मुकेश शर्मा, सर्वेश अस्थाना, सुदीप भोला, दिनेश बावरा, हेमंत पांडेय, कविता तिवारी व अन्य पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
: सरोकार:-- 19 दिसंबर हमारे राष्ट्र के लिए इतना अहम क्यों आइए जाने
Mon, Dec 19, 2022
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजूए कातिल में है । 19 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल रोज की भाँति सवेरे उठकर शौचादि के बाद दाढी बना रहे थे । उसी समय बाबा राघवदास उनसे अन्तिम मुलाकात करने आए थे । उन्हें दाढी बनाता देखकर बोले--" बिस्मिल ! आज तुम्हारी फांसी है और तुम हजामत बना रहे हो । इस पर बिस्मिल हंसकर बोले-- " जब कोई यात्रा पर जाता है तो बन संवर कर जाता है और मैं तो महायात्रा पर जा रहा हूँ ।" फांसी के लिए ले जाते समय बिस्मिल ने वन्देमातरम और भारत माता की जय का जोर से जयकारा लगाते हुए कहा-- " देश हित पैदा हुए हैं, देश पर मर जाएँगे । मरते-मरते देश को जिन्दा, मगर कर जाएँगे । डरता मौत से क्या है, अमर है आत्मा मेरी । नहीं कुछ कारगर होने की, उस पर तेग यह तेरी ।। भारत माँ के अमर सपूत रामप्रसाद बिस्मिल जी पुन्य: तिथि पर उन्हें कोटिशः नमन करते हुए श्रधा सुमन भेंट करते हैं
19 दिसंबर 1927 भारतीय इतिहास में एक बहुत ही अहम तारीख है। इस दिन भारतीय आवाम ने अपने तीन वीर सपूत खोये। फैजाबाद में अशफाक उल्ला, गोरखपुर में रामप्रसाद बिस्मिल और नैनी जेल में रोशन सिंह ने आजाद भारत का सपना लिए हुए फांसी के फंदे को चूम लिया। नौ अगस्त 1925 को काकोरी में आजादी के इन दीवानों ने भारतीयों की खून पसीने की कमाई को लूट कर ले जा रही अंग्रेजों की ट्रेन को रोक उस धन पर अपना अधिकार कर लिया और उस धन का प्रयोग भारत को आजाद कराने की योजनाओं को पूरा करने के लिए किया। अशफाक काकोरी एक्शन के क्रांतिकारियों में सबसे छोटे थे। वह किशोरावस्था में हसरत के उपनाम से शायरी किया करते थे। घर में जब भी शायरी की बात चलती थी, तो उनके बड़े भाई रामप्रसाद बिस्मिल का जिक्र किया करते थे। इन्ही किस्सों के चलते अशफाक बिस्मिल के दीवाने हो गये। इसी वक्त बिस्मिल का नाम मैनपुरी कांड में आना शुरू हो गया। इससे अशफाक बिस्मिल से मिलने के लिए बेचैन होने लगे और उन्होंने ठान लिया कि बिस्मिल से मुझे मिलना ही है। आखिरकार उनकी दोस्ती बड़े भाई के जरिये बिस्मिल से हो ही गयी। उसी समय शाहजहांपुर की एक मीटिग में भाषण देने बिस्मिल को आना था। कार्यक्रम खत्म हुआ तो अशफाक बिस्मिल के पास गए और अपना परिचय दिया कि मैं वारसी और हसरत के नाम से शायरी करता हूं। बिस्मिल की थोड़ी रुचि बढ़ी और उनके कुछ शेर सुने, जो उनको पसंद आये। इसी के बाद दोनों अक्सर साथ दिखने लगे और एक साथ आने जाने लगे। काकोरी एक्शन के हीरो अशफाक ने दोस्ती की जो मिसाल कायम की वह आज भी बेमिसाल है। भारतीय एकता व अखंडता में दूसरी कोई ऐसा उदाहारण नहीं है। भारत की आजादी की लड़ाई में हिदू-मुस्लिम एकता का इससे अच्छा प्रतिमान नहीं है।
भारत को आजादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह को 1927 में 19 दिसंबर के दिन ही फांसी दी गई थी। इस दिन को शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। आजादी के इन मतवालों को काकोरी कांड को अंजाम देने के लिए फांसी दी गई थी। 19 तारीख को हमारे देश के इतिहास में एक और बड़ी घटना दर्ज है। 1961 में 19 दिसंबर के दिन ही भारतीय सेना ने गोवा को 450 साल के पुर्तगाली शासन से आजाद कराया था। ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत भारतीय सैनिकों ने गोवा में प्रवेश किया था। इस ऑपरेशन की शुरूआत 18 दिसंबर, 1961 को की गई थी और 19 दिसंबर को पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण किया था।
: हमारा संविधान हमारे मौलिक अधिकारों का रक्षा कवच है
Sat, Dec 17, 2022
भारतीय संविधान की प्रकृति संघात्मक प्रकृति का है डॉक्टर बी आर अंबेडकर जिन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है या उनका विचार था, विश्व के संविधानओं की तुलना में भारतीय संविधान वृहद संविधान हैं इस संविधान में प्रशासन से संबंधित सभी प्रावधान राज्य के नीति निर्देशक तत्व मौलिक अधिकार मौलिक कर्तव्य राज्य तथा केंद्र के शासन से संबंधित प्रावधान नए ढांचे की पदसोपानआत्मक व्यवस्था इत्यादि का संपूर्ण विवरण दिया गया है यह वृहद हो गया है क्योंकि यह पूर्ण दस्तावेज है, मजबूत शक्तिशाली केंद्र के साथ संघवाद का स्थापित किया जाना भारतीय संविधान केंद्र तथा राज्य के मध्य अनोखे संघवाद संबंध की स्थापना करता है संघवाद इकाई स्थापित करते हुए केंद्र को अधिक मजबूत बनाया गया है इस संघवाद की अवधारणा के अंतर्गत केंद्र तथा राज्यों को अपने-अपने विषयों पर जिन्हें की संविधान के द्वारा उन्हें आवंटित किया गया है विधि निर्माण करने की शक्ति प्रदान की गई हैं तथा वे अलग-अलग शासन संचालित कर सकते हैं परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में शक्तियां जिन्हें पृथक कर दिया गया है केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजय भारतीय संविधान में ऐसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है जिससे आकस्मिक परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाली आकस्मिकता से निपटा जा सकता है आकस्मिकता से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 352 356 तथा 360 के अंतर्गत समाहित किए गए हैं जो आकस्मिकता से निपटने के लिए केंद्र को सशक्त बना देते हैंमौलिक अधिकारों की अवधारणा भारतीय संविधान के भाग 3 अनुच्छेद 12 से लेकर 35 तक में समाहित की गई हैं मौलिक अधिकार अधिकार होते हैं जो एक मानव प्राणी के स्वस्थ वातावरण में आधारभूत तथा सर्वांग पूर्ण विकास हेतु आवश्यक अपरिहार्य तथा प्रकृतितह वंचित होते हैं संविधान का भाग 3 एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को राज्य के विरुद्ध संरक्षित करता है यह व्यक्ति को राज्य के द्वारा निर्मित मनमानी विधियों से संरक्षित करने की प्रत्याभूत प्रदान करता है यह प्रत्याभूत मौलिक अधिकारों के माध्यम से राज्य द्वारा निर्मित मनमानी विधि अथवा किए गए कृत्य से संरक्षित होती हैं व्यक्ति अनुच्छेद 32 तथा 226 की सहायता मौलिक अधिकारों के भंग हो जाने पर प्राप्त कर सकते हैं {jayendra pandey Advocate}