: झांसी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड में प्रधानाचार्य हटाए , तीन निलंबित
Fri, Nov 29, 2024
लखनऊ। 27 नवम्बर झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड में दस बच्चों की मृत्यु के मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ी कार्यवाही की है। डिप्टी सीएम के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के प्रधानाचार्य को हटा दिया है। साथ ही कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को आरोप पत्र एवं तीन अन्य को निलंबित किया गया है।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि झांसी मेडिकल कॉलेज में हुई ह्रदय विदायक घटना को लेकर सरकार बेहद संवेदनशील है। पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर को पद से हटा दिया गया है। उन्हें चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर को आरोप पत्र दिया गया है। वहीं, कॉलेज के अवर अभियन्ता (विद्युत) संजीत कुमार, एनआईसीयू वार्ड की नर्सिंग सिस्टर इंचार्ज संध्या राय एवं मेडिकल कॉलेज की प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुनीता राठौर को तत्काल निलम्बित करते हुए आरोप पत्र दिया गया।*
कमिश्नरी जांच के निर्देश*
कॉलेज में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया, सर्जरी विभाग के सह-आचार्य डॉ. कुलदीप चंदेल व विद्युत प्रभारी अधिकारी को आरोप पत्र देकर उनकी भूमिका की जांच के लिए मण्डलायुक्त झांसी को जांच अधिकारी बनाया गया।*
यह थी घटना*
15 नवम्बर को झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से दस बच्चों की मृत्यु हो गई थी। हादसे के तुरंत बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक घटनास्थल पर पहुंचे थे और पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी थी। साथ ही दोषियों पर कार्यवाही का आश्वासन दिया था। डिप्टी सीएम ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को महानिदेशक की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद समीक्षा कर घटना में दोषियों के खिलाफ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा कार्रवाई की गई है।
: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की रवैया को लेकर सख्त टिप्पणी की
Thu, Nov 28, 2024
नई दिल्ली(28 नवंबर, 2024) भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस सत्ता का आनंद ले रही है और संवेदनशील होने की जरूरत है. कोर्ट ने ये चेतावनी भी दी कि अगर याचिकाकर्ता को छुआ भी तो ऐसा कोई कठोर आदेश पारित करेंगे कि जिंदगीभर याद रहेगासुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अनुराग दुबे के मामले में सुनवाई करते हुए कहा, जिन पर अलग-अलग कई मामले दर्ज हैं. उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुए, जिसे लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सवाल उठाए हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हो सकता है कि याचिकाकर्ता को ये डर है कि जांच के दौरान उस पर कोई और मामला दर्ज न कर दिया जाए.जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुईयां की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी. सुनवाई करते हुए कोर्ट को इस बात पर गुस्सा आ गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस याचिकाकर्ता पर एक के बाद एक कई एफआईआर दर्ज कर रही है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यूपी पुलिस एक खतरनाक एरिया में घुस रही है और अपनी पावर का इस्तेमाल करके वह मजे ले रही है. कोर्ट ने यूपी पुलिस के वकील से यह भी कहा कि अपने डीजीपी को बता देना कि कोर्ट ऐसा कठोर आदेश पास करेगा कि वह जिंदगी भर याद रखेंगे.इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग दुबे के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था. अनुराग के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 323, 386, 447, 504 और 506 के तहत एएफआईआर दर्ज हैं. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अन्य मामलों और अरोपों की प्रकृति के लिए यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था कि याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत क्यों नहीं दी जा रही है. इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्चा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और अनुराग दुबे से जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था.गुरुवार को यूपी सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट राणा मुखर्जी पेश हुए और उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश पर याचिकाकर्ता को नोटिस भेजा गया था. फिर भी वह पूछताछ के लिए अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए और एफिडेविट भेज दिया. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हो सकता है याचिकाकर्ता को डर हो कि कहीं यूपी पुलिस फिर से कोई केस ने दर्ज कर दे.जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'याचिकाकर्ता को पता है कि आप फिर से नया केस बना दोगे. आप अपने डीजीपी को बता सकते हैं कि अगर अनुराग दुबे को छुआ भी तो ऐसा आदेश पास करेंगे कि वह जिंदगीभर याद रखेंगे. हर बार आप नई एफआईआर के साथ आ जाते हो. किसी पर जमीन हड़पने का आरोप लगाना आसान है और जिसने पंजीकृत विक्रय पत्र द्वारा जमीन खरीदी है, आप उस पर जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं. ये सिविल विवाद है या आपराधिक विवाद है? हम बस बता रहे हैं कि यूपी पुलिस एक खतरनाक क्षेत्र में घुस रही है और मजे ले रही है. आपको लगता है कि पुलिस और सिविल कोर्ट की पावर आपके पास है तो आप मजे ले रहे हो.'सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अनुराग दुबे के वकील से भी पूछा कि याचिकाकर्ता जांच के लिए पेश क्यों नहीं हो रहे हैं. तब वकील ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई नोटिस नहीं भेजा गया है, जबकि याचिकाकर्ता ने पुलिस को अपना मोबाइल नंबर भी दिया है ताकि उन्हें बता दिया जाए कि जांच के लिए कब और कहां पेश होना है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने यूपी पुलिस के वकील से पूछा कि याचिकाकर्ता को किस तरह नोटिस भेजा गया था तो एडवोकेट ने बताया कि उन्हें लेटर भेजा गया था. इस पर जज ने कहा कि अब सब डिजिटल हो गया है इसलिए अनुराग दुबे के मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजें. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने दिया जाए, पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी. अगर किसी मामले में अरेस्ट करने की जरूरत लगती है तो आएं और हमें बताएं कि ये कारण हैं इसलिए अरेस्ट करना है. हालांकि, अगर पुलिस अधिकारी कोर्ट को बगैर बताए गिरफ्तार करते हैं तो उन्हें सस्पेंड तो किया ही जाएगा साथ में और भी बहुत कुछ भुगतना पड़ेगा
: यमुना प्राधिकरण की नई आवासीय प्लॉट स्कीम हिट, 945 प्लॉट्स
Wed, Jul 10, 2024
यमुना कास प्राधिकरण से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यमुना प्राधिकरण ने अपनी नई आवासीय प्लॉट की स्कीम लॉन्च के चार दिन में ही हिट हो गई। जेवर में बन रहे नोएडा एयरपोर्ट के पास नई आवासीय योजना की लॉन्चिंग के बाद से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस योजना के तहत अब तक 5,919 (करीब 6 हजार) आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से कई लोगों ने अपनी जमा राशि भी जमा कर दी है। यह आंकड़ा केवल चार दिनों का है, जो इस योजना की लोकप्रियता और लोगों की उत्सुकता को दर्शाता है। इस स्कीम में 945 प्लॉट्स हैं। खास बात यह है कि इसमें किसानों को साढ़े 17 परसेंट आरक्षण दिया गया है।यमुना प्राधिकरण ने नई आवासीय योजना की शुरुआत की है, जिसमें बड़ी संख्या में प्लॉट और आवासीय इकाइयां शामिल हैं। इस योजना के तहत आवेदनकर्ताओं को शुरुआती 10 प्रतिशत पैसा जमा करना होता है, जिसके बाद उन्हें योजना में शामिल किया जाता है। इस नई योजना की सफलता को देखते हुए यमुना प्राधिकरण ने और भी योजनाओं को जोड़ने की योजना बनाई है।
जल्द लॉन्च होंगी कई स्कीमें
आने वाले समय में प्राधिकरण विभिन्न नए सेक्टरों और मास्टर प्लान के तहत अधिक प्लॉट और आवासीय इकाइयों को शामिल करेगा। इस साल के अंत तक और भी कई बड़ी आवासीय योजनाएं लाने की योजना है, जिसमें दिसंबर महीने में एक विशेष योजना भी शामिल है। इस साल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का वार्षिक लक्ष्य करोड़ों रुपये का है, जिसमें समूह हाउसिंग और अन्य बड़ी आवासीय योजनाएं शामिल होंगी। यह प्राधिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के विकास और आवासीय सुविधाओं के विस्तार में योगदान देगा।