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: आज से शुभ लग्न मुहूर्त स्थगित खरमास शुरू

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Sat, Dec 17, 2022
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खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ सूर्य के बृहस्पति की धनुराशि में गोचर करने से खरमास शुरू होता है। यह स्थिति मकर संक्रान्ति तक रहती है। इस कारण मांगलिक कार्य नहीं होते है। जैसे ही सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तभी से खरमास आरम्भ हो जाता है और इसी के साथ शादी विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य निषेध हो जाते है। इस माह में सूर्य धनु राशि का होता है। ऐसे में सूर्य का बल वर को प्राप्त नहीं होता। इस वर्ष 16 दिसंबर प्रातः 09:55 पर सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से लेकर 14 जनवरी 2022 रात्रि 08:43 सूर्य के मकर राशि मे प्रवेश करने तक तक खरमास रहेगा। वर को सूर्य का बल और वधू को बृहस्पति का बल होने के साथ ही दोनों को चंद्रमा का बल होने से ही विवाह के योग बनते हैं। इस पर ही विवाह की तिथि निर्धारित होती है। खरमास शुरू हो जाने से विवाह संस्कारों पर एक माह के लिए रोक लग जाएगी। साथ ही अनेक शुभ संस्कार जैसे जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश भी नहीं किया जाएगा। हमारे भारतीय पंचांग के अनुसार सभी शुभ कार्य रोक दिए जाएंगे। खरमास कई स्थानों पर मलमास के नाम से भी विख्यात है। शास्त्रों में मलमास शब्द की यह व्युत्पत्ति निम्न प्रकार से बताई गई है। ‘मली सन् म्लोचति गच्छतीति मलिम्लुचः’ अर्थात् ‘मलिन (गंदा) होने पर यह आगे बढ़ जाता है।’ हिन्दू धर्म ग्रंथों में इस पूरे महीने में किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही है। जब गुरु की राशि धनु में सूर्य आते हैं तब खरमास का योग बनता है। वर्ष में दो मलमास पहला धनुर्मास और दूसरा मीन मास आता है। यानी सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है तब खर या मलमास होता है क्योंकि सूर्य के कारण बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। इसलिये सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से विवाह संस्कार आदि कार्य निषेध माने जाते हैं। विवाह और शुभ कार्यों से जुड़ा यह नियम मुख्य रूप से उत्तर भारत में लागू होता है जबकि दक्षिण भारत में इस नियम का पालन कम किया जाता है। मद्रास, चेन्नई, बेंगलुरू में इस दोष से विवाह आदि कार्य मुक्त होते हैं। गीता सार !! खरमास में व्रत का महत्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जो व्यक्ति खरमास में पूरे माह व्रत का पालन करते हैं उन्हें पूरे माह भूमि पर ही सोना चाहिए. एक समय केवल सादा तथा सात्विक भोजन करना चाहिए. इस मास में व्रत रखते हुए भगवान पुरुषोत्तम अर्थात विष्णु जी का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए तथा मंत्र जाप करना चाहिए. श्रीपुरुषोत्तम महात्म्य की कथा का पठन अथवा श्रवण करना चाहिए. श्री रामायण का पाठ या रुद्राभिषेक का पाठ करना चाहिए. साथ ही श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता है। मास के आरम्भ के दिन श्रद्धा भक्ति से व्रत तथा उपवास रखना चाहिए. इस दिन पूजा – पाठ का अत्यधिक महात्म्य माना गया है. इसमास मे प्रारंभ के दिन दानादि शुभ कर्म करने का फल अत्यधिक मिलता है. जो व्यक्ति इस दिन व्रत तथा पूजा आदि कर्म करता है वह सीधा गोलोक में पहुंचता है और भगवान कृष्ण के चरणों में स्थान पाता है। खरमास की समाप्ति पर स्नान, दान तथा जप आदि का अत्यधिक महत्व होता है. इस मास की समाप्ति पर व्रत का उद्यापन करके ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और अपनी श्रद्धानुसार दानादि करना चाहिए. इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण बात यह है कि खरमास माहात्म्य की कथा का पाठ श्रद्धापूर्वक प्रात: एक सुनिश्चित समय पर करना चाहिए। इस मास में रामायण, गीता तथा अन्य धार्मिक व पौराणिक ग्रंथों के दान आदि का भी महत्व माना गया है. वस्त्रदान, अन्नदान, गुड़ और घी से बनी वस्तुओं का दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है। खरमास की पौराणिक प्रचलित कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ लोक कथाओं के अनुसार खरमास (मलमास) को अशुभ माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। खर गधे को कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्कण्डेय पुराण के अनुसार एक बार सूर्य अपने सात घोड़ों के राथ को लेकर ब्राह्मांड की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़ते हैं। इस परिक्रमा के दौरान सूर्य देव को रास्ते में कहीं भी रूकने की मनाही होती है, लेकिन सूर्य देव के सातों घोड़े कई साल निरंतर दौड़ने की वजह से जब प्यास से व्याकुल हो जाते हैं सुखदेव पानी भरने के लिए निकट बने एक तालाब के पास रुक जाते हैं तभी उन्हें स्मरण होता है कि उन्हें रास्ते में तो कहीं रुकना ही नहीं है तो वे कुंड के पास कुछ गधों को अपने रक्त से जोड़कर आगे बढ़ जाते हैं जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है यही वजह है कि खरमास को अशुभ माह के रूप में देखा जाता है प्रेषक पंडित कन्हैयालाल मिश्र( सर्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर राम राम बैंक अलीगंज लखनऊ)

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