Tue 15 Sep 2026
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योगी सरकार के काम पर सवाल नहीं, लेकिन जनता से दूरी और विपक्ष के वादे बन सकते हैं खेल बदलने वाला फैक्टर बदलते हालात में देश के सामने नई चुनौतियां और अवसर Cognito Exhibition ने बदली सीखने की परिभाषा किसान संगठन ने लगाएं गंभीर आरोप CAG रिपोर्ट के आधार पर नीतियों के वितरण में पारदर्शिता का अभाव अब बनेगी नई युवा नीति, मुख्यमंत्री योगी की घोषणा कूटनीतिक तनाव—वैश्विक स्थिरता पर बड़ा सवाल राष्ट्रवाद, विकास और सामाजिक समरसता पर जोर 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने देश को दिखाई नई दिशा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हिंदुजा मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को किया फ्लैग ऑफ योगी सरकार के काम पर सवाल नहीं, लेकिन जनता से दूरी और विपक्ष के वादे बन सकते हैं खेल बदलने वाला फैक्टर बदलते हालात में देश के सामने नई चुनौतियां और अवसर Cognito Exhibition ने बदली सीखने की परिभाषा किसान संगठन ने लगाएं गंभीर आरोप CAG रिपोर्ट के आधार पर नीतियों के वितरण में पारदर्शिता का अभाव अब बनेगी नई युवा नीति, मुख्यमंत्री योगी की घोषणा कूटनीतिक तनाव—वैश्विक स्थिरता पर बड़ा सवाल राष्ट्रवाद, विकास और सामाजिक समरसता पर जोर 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने देश को दिखाई नई दिशा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हिंदुजा मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को किया फ्लैग ऑफ

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: हमेशा के लिए खत्म हो गई धारा 370 सुप्रीम कोर्ट का फैसला!

नई दिल्ली 13 दिसंबर जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के 2019 के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसबंर को फैसला सुनाया इस अनुच्छेद के जरिए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था। जो की 5 सितंबर 2019 मैं केंद्र सरकार की फैसले के बाद समाप्त कर दिया गया देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने सोमवार को सुबह 11 बजे ही इस मामले में फैसला पढ़ना शुरू किया। इस पीठ में सीजेआई के अलावा, जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत हैं। गौरतलब है कि सितंबर माह में लगातार 16 दिनों तक सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। तीन अलग-अलग फैसले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि पांच जजों के तीन अलग-अलग फैसले हैं। जिन तीन फैसलों को सुनाया जाना है, उस पर सभी एकमत हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमने उस दौरान राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन पर फैसला नहीं लिया है। स्थिति के अनुसार राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 356 में राष्ट्रपति को शक्तियां हासिल हैं। उसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। संवैधानिक स्थिति यही है कि उनका उचित इस्तेमाल होना चाहिए। अनुच्छेद 356 – राज्य सरकार भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने की बात करता है। राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र राज्य सरकार की जगह फैसले ले सकता है। संसद राज्य विधानसभा की जगह काम कर सकता है।

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